भारतीय दर्शन
न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, पूर्व मीमांसा, वेदांत — षड्दर्शन, तथा कर्म, पुनर्जन्म, आत्मा, मोक्ष, ब्रह्म, चक्र, कुंडलिनी, धर्म जैसी केंद्रीय अवधारणाएँ।
षड्दर्शन
न्याय दर्शन
न्याय दर्शन तर्कशास्त्र (Logic) एवं ज्ञानमीमांसा (Epistemology) पर केंद्रित है — यह मुख्य रूप से यह …
वैशेषिक दर्शन
वैशेषिक दर्शन भौतिक जगत के विश्लेषण पर केंद्रित है — द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष एवं समवाय — इ…
सांख्य दर्शन
सांख्य दर्शन पुरुष (शुद्ध चेतना) एवं प्रकृति (जड़ तत्त्व) के द्वैतवाद पर आधारित है — सृष्टि की समस्त…
योग दर्शन
योग दर्शन सांख्य के तत्त्व-सिद्धांत को स्वीकार करते हुए चित्तवृत्तियों के निरोध (मन की चंचलता को शां…
पूर्व मीमांसा दर्शन
पूर्व मीमांसा दर्शन वैदिक कर्मकाण्ड (यज्ञ-विधियों) की व्याख्या एवं शब्द-प्रामाण्य (वेद-वाक्यों की स्…
वेदांत दर्शन (उत्तर मीमांसा)
वेदांत दर्शन उपनिषदों, ब्रह्मसूत्र एवं भगवद्गीता ("प्रस्थानत्रयी") पर आधारित है, तथा ब्रह्म (परम सत्…
केंद्रीय अवधारणाएँ
84 लाख योनियाँ
"84 लाख योनियाँ" एक परंपरागत पौराणिक अवधारणा है, जिसके अनुसार आत्मा मो…
आत्मा
आत्मा उस चेतन, शाश्वत तत्त्व को कहा जाता है जो शरीर, मन एवं बुद्धि से …
कर्म
कर्म का शाब्दिक अर्थ है "क्रिया/कर्तव्य", परंतु दार्शनिक अर्थ में यह उ…
कुंडलिनी
कुंडलिनी को तांत्रिक/हठयोग परंपरा में मूलाधार चक्र में सुप्त अवस्था मे…
चक्र
योग एवं तांत्रिक परंपरा में "चक्र" सूक्ष्म शरीर में स्थित ऊर्जा-केंद्र…
धर्म
धर्म एक बहुआयामी संस्कृत शब्द है जिसका कोई एक सटीक अंग्रेज़ी/हिंदी पर्…
पुनर्जन्म
पुनर्जन्म की अवधारणा के अनुसार आत्मा मृत्यु के पश्चात अपने संचित कर्मो…
ब्रह्म
ब्रह्म वेदांत दर्शन में परम सत्य/परम तत्त्व को कहा जाता है — वह अनंत, …
मोक्ष
मोक्ष का अर्थ है जन्म-मृत्यु के चक्र (संसार) से अंतिम मुक्ति — यह भारत…
कर्म · पुनर्जन्म · 84 लाख योनियाँ — इन विषयों के लिए समर्पित पृष्ठ भी देखें।