मोक्ष
मोक्ष
मोक्ष का अर्थ है जन्म-मृत्यु के चक्र (संसार) से अंतिम मुक्ति — यह भारतीय दर्शन की लगभग सभी परंपराओं में जीवन का परम लक्ष्य (पुरुषार्थ) माना जाता है।
पाठ्य आधार
उपनिषद, भगवद्गीता, ब्रह्मसूत्र
प्रमुख चिंतक
सभी प्रमुख दार्शनिक आचार्य
यथार्थ की अवधारणा
संसार-चक्र से परे एक शाश्वत अवस्था — इसकी प्रकृति (व्यक्तित्व का बने रहना या ब्रह्म में विलीन होना) पर परंपराओं में मतभेद है।
मोक्ष का मार्ग
ज्ञान (अद्वैत), भक्ति (वैष्णव परंपराएँ), या कर्म-योग (निष्काम कर्म) — मार्ग परंपरा-अनुसार भिन्न।
विभिन्न परंपराओं में व्याख्या-भेद: ### अद्वैत वेदांत: मोक्ष का अर्थ है आत्मा का ब्रह्म में तादात्म्य का साक्षात्कार — व्यक्तित्व "मिथ्या" सिद्ध होकर विलीन हो जाता है।
### विशिष्टाद्वैत/द्वैत (भक्ति परंपराएँ): मोक्ष में जीव अपना व्यक्तित्व बनाए रखते हुए ईश्वर के सान्निध्य/सेवा में शाश्वत आनंद का अनुभव करता है — विलीन नहीं होता।
### योग दर्शन: कैवल्य — पुरुष का प्रकृति से पूर्ण पृथक्करण।
### विशिष्टाद्वैत/द्वैत (भक्ति परंपराएँ): मोक्ष में जीव अपना व्यक्तित्व बनाए रखते हुए ईश्वर के सान्निध्य/सेवा में शाश्वत आनंद का अनुभव करता है — विलीन नहीं होता।
### योग दर्शन: कैवल्य — पुरुष का प्रकृति से पूर्ण पृथक्करण।