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चक्र

चक्र

योग एवं तांत्रिक परंपरा में "चक्र" सूक्ष्म शरीर में स्थित ऊर्जा-केंद्रों को कहा जाता है — परंपरागत रूप से सामान्यतः सात प्रमुख चक्र (मूलाधार से सहस्रार तक) वर्णित किए जाते हैं।

पाठ्य आधार

तांत्रिक ग्रंथ, हठयोग परंपरा के ग्रंथ (जैसे हठयोगप्रदीपिका)

प्रमुख चिंतक

तांत्रिक एवं हठयोग परंपरा के आचार्य

मोक्ष का मार्ग

चक्रों के जागरण एवं संतुलन को कुंडलिनी-योग परंपरा में आध्यात्मिक उन्नति से जोड़ा जाता है।

विभिन्न परंपराओं में व्याख्या-भेद: ### यह सूक्ष्म-शरीर संबंधी अवधारणा है — भौतिक शरीर-रचना (anatomy) में चक्रों का कोई प्रत्यक्ष वैज्ञानिक रूप से सिद्ध भौतिक अंग-तंत्र समकक्ष नहीं पाया गया है। यह योग/तांत्रिक परंपरा में वर्णित एक आध्यात्मिक अवधारणा है, चिकित्सा-विज्ञान द्वारा प्रमाणित शारीरिक संरचना नहीं (देखें /science)।