धर्म
धर्म
धर्म एक बहुआयामी संस्कृत शब्द है जिसका कोई एक सटीक अंग्रेज़ी/हिंदी पर्याय नहीं है — इसमें कर्तव्य, नैतिकता, सृष्टि की व्यवस्था बनाए रखने वाला नियम, तथा व्यक्ति/समाज का उचित आचरण — ये सभी अर्थ समाहित हैं।
पाठ्य आधार
भगवद्गीता (विशेषकर "स्वधर्म" की चर्चा, अध्याय 3), धर्मशास्त्र ग्रंथ, महाभारत
प्रमुख चिंतक
यह अवधारणा किसी एक दार्शनिक तक सीमित नहीं।
विभिन्न परंपराओं में व्याख्या-भेद: ### धर्म की व्याख्या संदर्भ-अनुसार बदलती है — व्यक्तिगत धर्म (स्वधर्म), सामाजिक धर्म (वर्णाश्रम-धर्म, जो आधुनिक समानता-मूल्यों की दृष्टि से विवादास्पद है), तथा सार्वभौमिक/ब्रह्मांडीय नियम (सनातन धर्म) — इन तीनों स्तरों को परस्पर मिलाया नहीं जाना चाहिए।