चतुरशीतिलक्ष योनि
84 लाख योनियाँ
"84 लाख योनियाँ" एक परंपरागत पौराणिक अवधारणा है, जिसके अनुसार आत्मा मोक्ष-प्राप्ति से पूर्व 84 लाख विभिन्न प्रकार की योनियों (जीव-प्रजातियों/जन्म-रूपों) में भ्रमण करती है, तथा मनुष्य-जन्म को इस चक्र में मोक्ष-प्राप्ति हेतु सर्वाधिक दुर्लभ एवं मूल्यवान अवसर माना जाता है।
पाठ्य आधार
गरुड़ पुराण एवं अन्य पुराणों में इस अवधारणा का उल्लेख मिलता है — परंतु "84 लाख" की सटीक संख्या का मूल स्रोत एवं इसकी गणना-पद्धति पर स्पष्ट, एकमत शास्त्रीय प्रमाण उपलब्ध नहीं है; विभिन्न परंपराओं में यह संख्या एक प्रतीकात्मक विशालता (अनगिनत योनियाँ) के रूप में भी व्याख्यित की जाती है।
प्रमुख चिंतक
पौराणिक परंपरा — किसी एक विशिष्ट दार्शनिक को इसका श्रेय नहीं दिया जाता।
मोक्ष का मार्ग
मनुष्य-जन्म को मोक्ष-प्राप्ति हेतु सर्वाधिक उपयुक्त एवं दुर्लभ अवसर मानते हुए इसे सार्थक बनाने (आध्यात्मिक साधना) का आह्वान।
विभिन्न परंपराओं में व्याख्या-भेद: ### अत्यंत महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण: "84 लाख योनियाँ" एक परंपरागत धार्मिक/पौराणिक अवधारणा है, यह आधुनिक जैविक वर्गीकरण (biological taxonomy) का वैज्ञानिक आँकड़ा नहीं है। आधुनिक जीव विज्ञान में वर्णित एवं अवर्णित प्रजातियों की संख्या का अनुमान भिन्न-भिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों में अलग-अलग है, और यह पौराणिक संख्या से इसकी तुलना करना वैज्ञानिक रूप से अनुपयुक्त है। इस पृष्ठ पर दोनों — परंपरागत अवधारणा एवं आधुनिक जैविक वर्गीकरण — को स्पष्ट रूप से अलग रखा गया है।