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उपनिषद

ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक सहित प्रमुख उपनिषदों का परिचय एवं संबंधित वेद।

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ईशावास्योपनिषद

ईशोपनिषद

शुक्ल यजुर्वेद से संबद्ध, अत्यंत संक्षिप्त (18 मंत्र) परंतु दार्शनिक दृष्टि से अत्यंत सघन उपनिषद — त्याग एवं भ…

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ऐतरेयोपनिषद्

ऐतरेयोपनिषद

ऋग्वेद से संबद्ध — सृष्टि-प्रक्रिया एवं आत्मा की प्रकृति पर केंद्रित; "प्रज्ञानं ब्रह्म" महावाक्य का स्रोत।

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कठोपनिषद्

कठोपनिषद

कृष्ण यजुर्वेद से संबद्ध — नचिकेता एवं यमराज के संवाद के माध्यम से मृत्यु, आत्मा एवं मोक्ष की चर्चा।

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केनोपनिषद्

केनोपनिषद

सामवेद से संबद्ध — ब्रह्म की अवर्णनीय प्रकृति पर केंद्रित, "केन" (किसके द्वारा?) प्रश्न से आरंभ।

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छान्दोग्योपनिषद्

छान्दोग्योपनिषद

सामवेद से संबद्ध, बृहदारण्यक के साथ सबसे प्राचीन एवं विस्तृत उपनिषदों में से एक — "तत्त्वमसि" महावाक्य (उद्दाल…

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तैत्तिरीयोपनिषद्

तैत्तिरीयोपनिषद

कृष्ण यजुर्वेद से संबद्ध — पंचकोश (अन्नमय से आनंदमय तक) सिद्धांत एवं शिक्षा-व्यवस्था पर प्रसिद्ध अनुशासन-मंत्र…

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प्रश्नोपनिषद्

प्रश्नोपनिषद

अथर्ववेद से संबद्ध — छह शिष्यों द्वारा गुरु पिप्पलाद से पूछे गए छह प्रश्नों के रूप में संरचित।

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बृहदारण्यकोपनिषद्

बृहदारण्यकोपनिषद

शुक्ल यजुर्वेद से संबद्ध — सबसे विस्तृत उपनिषद, याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी संवाद तथा "अहं ब्रह्मास्मि" महावाक्य का स…

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माण्डूक्योपनिषद्

माण्डूक्योपनिषद

अथर्ववेद से संबद्ध — सबसे संक्षिप्त उपनिषद (12 मंत्र), "ॐ" एवं चेतना की चार अवस्थाओं (जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति…

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मुण्डकोपनिषद्

मुण्डकोपनिषद

अथर्ववेद से संबद्ध — परा एवं अपरा विद्या का भेद; "सत्यमेव जयते" वाक्य का मूल स्रोत।

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श्वेताश्वतरोपनिषद्

श्वेताश्वतरोपनिषद

कृष्ण यजुर्वेद से संबद्ध — ईश्वर (रुद्र/शिव) की व्यक्तिगत अवधारणा एवं सांख्य-योग के तत्त्वों का समन्वय प्रस्तु…