दैवासुरसम्पद्विभागयोगः
दैवासुरसंपद्विभागयोग
दैवी एवं आसुरी स्वभाव के गुणों का तुलनात्मक वर्णन — मानव-चरित्र की नैतिक विवेचना।
इस अध्याय के लिए विस्तृत श्लोक-दर-श्लोक व्याख्या अभी संपादकीय समीक्षा में है — शीघ्र जोड़ी जाएगी।
यहाँ दी गई "सरल व्याख्या" एवं "व्यावहारिक जीवन-शिक्षा" Sanatan Unity की अपनी सरलीकृत प्रस्तुति है — यह किसी विशिष्ट पारंपरिक भाष्य (जैसे शंकराचार्य/रामानुजाचार्य/मध्वाचार्य भाष्य) का प्रतिस्थापन नहीं है।