अर्जुनविषादयोगः
अर्जुनविषादयोग
कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन अपने ही परिजनों, गुरुजनों एवं मित्रों को युद्ध हेतु सामने खड़ा देख शोक एवं मोह से ग्रस्त हो जाते हैं और युद्ध करने से इनकार कर देते हैं।
इस अध्याय के लिए विस्तृत श्लोक-दर-श्लोक व्याख्या अभी संपादकीय समीक्षा में है — शीघ्र जोड़ी जाएगी।
यहाँ दी गई "सरल व्याख्या" एवं "व्यावहारिक जीवन-शिक्षा" Sanatan Unity की अपनी सरलीकृत प्रस्तुति है — यह किसी विशिष्ट पारंपरिक भाष्य (जैसे शंकराचार्य/रामानुजाचार्य/मध्वाचार्य भाष्य) का प्रतिस्थापन नहीं है।