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अध्याय 13 · 35 श्लोक (कुछ पाठ-परंपराओं में 34)
क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोगः

क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग

क्षेत्र (शरीर/प्रकृति) एवं क्षेत्रज्ञ (आत्मा/चेतना) के भेद का विश्लेषण — सांख्य दर्शन के प्रभाव को स्पष्ट दर्शाने वाला अध्याय।

इस अध्याय के लिए विस्तृत श्लोक-दर-श्लोक व्याख्या अभी संपादकीय समीक्षा में है — शीघ्र जोड़ी जाएगी।

यहाँ दी गई "सरल व्याख्या" एवं "व्यावहारिक जीवन-शिक्षा" Sanatan Unity की अपनी सरलीकृत प्रस्तुति है — यह किसी विशिष्ट पारंपरिक भाष्य (जैसे शंकराचार्य/रामानुजाचार्य/मध्वाचार्य भाष्य) का प्रतिस्थापन नहीं है।
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