भगीरथ एवं गंगा का अवतरण
पुराणों के अनुसार, राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों (सगर के पुत्रों) की मुक्ति हेतु गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने का संकल्प लिया एवं कठोर तपस्या की। गंगा का वेग इतना प्रबल था कि पृथ्वी उसे सहन नहीं कर सकती थी, अतः शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को धारण कर उसके वेग को नियंत्रित किया, तत्पश्चात गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं। इसी कारण गंगा को "भागीरथी" भी कहा जाता है।
अर्थ
यह कथा गंगा नदी के पवित्र माने जाने एवं शिव से इसके संबंध की परंपरागत व्याख्या प्रस्तुत करती है।
नैतिक शिक्षा
दृढ़ संकल्प एवं निरंतर प्रयास (तपस्या) से असंभव प्रतीत होने वाला कार्य भी संभव हो सकता है — तथा प्रबल शक्ति को नियंत्रित रूप से उपयोग करने की आवश्यकता (शिव द्वारा गंगा-वेग नियंत्रण) का प्रतीकात्मक महत्व भी है।
भिन्न संस्करण: यह कथा विभिन्न पुराणों (भागवत, विष्णु पुराण अन्य) में थोड़े भिन्न विवरण के साथ वर्णित है।