प्राणायाम
प्राणायाम
प्राणायाम श्वास के नियमन के माध्यम से प्राण (जीवन-ऊर्जा) को नियंत्रित करने की विधि है — अष्टांग योग का चौथा अंग। अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भस्त्रिका जैसी अनेक विधियाँ योग-परंपरा में वर्णित हैं।
विधि
नियंत्रित, लयबद्ध श्वास-प्रश्वास — विधि-विशेष अनुसार भिन्न (पूरक/रेचक/कुम्भक का अनुपात)।
परंपरागत लाभ
मन की स्थिरता, ऊर्जा-संतुलन एवं ध्यान हेतु तैयारी — योग-परंपरा के अनुसार।
आधुनिक शोध-टिप्पणी: नियंत्रित श्वसन-अभ्यासों के तनाव एवं स्वायत्त तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव पर सामान्य वैज्ञानिक रुचि रही है — विशिष्ट परिणामों के दावे इस पृष्ठ पर तभी जोड़े जाएँगे जब सत्यापित शोध-संदर्भ उपलब्ध हों। प्राणायाम का तीव्र/उन्नत अभ्यास बिना योग्य प्रशिक्षक के मार्गदर्शन के नहीं किया जाना चाहिए।