शल्य चिकित्सा (नासा-पुनर्निर्माण)
सुश्रुत संहिता · सूत्रस्थान/चिकित्सास्थान
सुश्रुत संहिता में नासिका-पुनर्निर्माण (rhinoplasty) की एक विधि का वर्णन मिलता है, जिसमें माथे की त्वचा के एक भाग (फ्लैप) का उपयोग कर नाक का पुनर्निर्माण किया जाता था — साथ ही लगभग 300 शल्य-प्रक्रियाओं एवं 120 से अधिक शल्य-उपकरणों का वर्णन भी है।
यह प्राचीन भारतीय आयुर्वेद परंपरा में शल्य चिकित्सा के उच्च विकसित स्तर का प्रमाण है, जिसे परंपरा में "शल्य तंत्र" कहा जाता है।
आधुनिक प्लास्टिक/पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा (Reconstructive Surgery)
चिकित्सा-इतिहासकार सुश्रुत संहिता में वर्णित "माथे के फ्लैप" (forehead flap) पद्धति को आधुनिक rhinoplasty तकनीकों के एक प्रारंभिक ऐतिहासिक पूर्ववर्ती के रूप में स्वीकार करते हैं — वास्तव में, 18वीं शताब्दी में ब्रिटिश शल्य-चिकित्सकों ने भारतीय शल्य-चिकित्सकों से यह विधि प्रत्यक्ष रूप से सीखी थी, जो चिकित्सा-इतिहास में एक प्रलेखित घटना है।