पृथ्वी का अक्षीय घूर्णन
आर्यभटीय · गोलपाद · श्लोक/सूत्र 4.9 (सामान्य संदर्भ — सटीक श्लोक-क्रमांक संस्करण-भेद से भिन्न हो सकता है)
आर्यभट (499 ई.) ने आर्यभटीय के गोलपाद खंड में स्पष्ट रूप से कहा कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, तथा आकाश में तारों की प्रतीत होने वाली गति वास्तव में पृथ्वी के घूर्णन का परिणाम है — उन्होंने इसे नाव में बैठे व्यक्ति को किनारे के पेड़ पीछे जाते प्रतीत होने की उपमा से समझाया।
यह आर्यभट का एक प्रत्यक्ष, स्पष्ट खगोलीय कथन था, जो उस समय की प्रचलित स्थिर-पृथ्वी अवधारणा के विपरीत था — परवर्ती कुछ भारतीय खगोलशास्त्रियों (जैसे ब्रह्मगुप्त) ने भी इस पर बहस की।
पृथ्वी का अक्षीय घूर्णन (आधुनिक खगोलशास्त्र में सुस्थापित तथ्य)
आधुनिक खगोलशास्त्र पूर्णतः पुष्टि करता है कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है — आर्यभट का यह कथन आधुनिक समझ के अनुरूप था, यद्यपि इसका गणितीय/भौतिक आधार (जड़त्व, घूर्णन-गति के भौतिक नियम) आधुनिक भौतिकी से भिन्न था।