याज्ञवल्क्य
याज्ञवल्क्य
काल (परंपरागत): वैदिक उत्तरकाल (परंपरागत) · परंपरा: शुक्ल यजुर्वेद / उपनिषद परंपरा
याज्ञवल्क्य बृहदारण्यक उपनिषद के केंद्रीय ऋषि हैं, जिनके अपनी पत्नी मैत्रेयी से आत्मा की प्रकृति पर हुए संवाद ("मैत्रेयी संवाद") के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। शुक्ल यजुर्वेद की वाजसनेयी संहिता का श्रेय भी परंपरा में इन्हें दिया जाता है।
शैक्षणिक कालनिर्धारण-टिप्पणी: बृहदारण्यक उपनिषद में वर्णित संवादों के आधार पर विद्वान इन्हें वैदिक साहित्य के उत्तरकालीन, उपनिषद-कालीन ऋषियों में गिनते हैं।
योगदान
वेदांत दर्शन की आरंभिक नींव में योगदान।
शिक्षाएँ
आत्मा, ब्रह्म एवं मोक्ष पर गहन दार्शनिक संवाद — "आत्मा ही अंततः प्रिय है" जैसी शिक्षाओं के लिए प्रसिद्ध।
संबंधित ग्रंथ
बृहदारण्यक उपनिषद, शुक्ल यजुर्वेद (वाजसनेयी संहिता), याज्ञवल्क्य स्मृति