कृष्ण द्वैपायन व्यास
वेदव्यास
काल (परंपरागत): द्वापर युग (परंपरागत) · परंपरा: स्मार्त/वैदिक परंपरा
वेदव्यास को परंपरा में वेदों को चार भागों (ऋग्, यजुः, साम, अथर्व) में विभाजित करने वाला, महाभारत के रचयिता, तथा 18 महापुराणों के संकलनकर्ता के रूप में सम्मानित किया जाता है। गुरु पूर्णिमा को "व्यास पूर्णिमा" के रूप में मनाया जाता है।
शैक्षणिक कालनिर्धारण-टिप्पणी: परंपरा वेदों के संकलन, महाभारत की रचना, तथा 18 पुराणों की रचना — तीनों का श्रेय एक ही "व्यास" को देती है। आधुनिक शोध में "व्यास" को एक व्यक्ति के बजाय एक उपाधि/संपादकीय परंपरा मानने का भी मत है, क्योंकि इन ग्रंथों की भाषा-शैली में सदियों का अंतर पाया जाता है।
योगदान
भारतीय इतिहास एवं ग्रंथ-परंपरा में केंद्रीय संकलनकर्ता के रूप में स्मरणीय — चाहे व्यक्तिगत रूप में हों या संपादकीय परंपरा के रूप में।
शिक्षाएँ
वेदों का व्यवस्थित विभाजन एवं संकलन; महाभारत के माध्यम से धर्म, नीति एवं जीवन-दर्शन की विस्तृत शिक्षा।
संबंधित ग्रंथ
महाभारत, ब्रह्मसूत्र (वेदांत के प्रवर्तक — पारंपरिक मत), 18 पुराण (संकलनकर्ता के रूप में श्रेय)