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📚 ऐतिहासिक स्रोत जीवनी-विश्वसनीयता: सत्यापित
वराहमिहिर

वराहमिहिर

काल (परंपरागत): लगभग 505–587 ई. · परंपरा: भारतीय खगोलशास्त्र/ज्योतिष

वराहमिहिर उज्जैन के प्रसिद्ध खगोलशास्त्री-गणितज्ञ थे, जिनका ग्रंथ "बृहत्संहिता" खगोलशास्त्र, भूगोल, वास्तुकला एवं प्राकृतिक विज्ञान के विविध विषयों को समेटे हुए है। उनका "पंचसिद्धांतिका" पाँच तत्कालीन खगोलीय सिद्धांतों (जिनमें ग्रीक प्रभाव वाला "रोमक सिद्धांत" भी शामिल है) का सारांश प्रस्तुत करता है।

योगदान

भारतीय खगोलशास्त्र में समकालीन विभिन्न परंपराओं (भारतीय एवं यवन/ग्रीक प्रभावित) के तुलनात्मक अध्ययन का दस्तावेज़ीकरण।

शिक्षाएँ

खगोलशास्त्र, ज्योतिष, वास्तुकला एवं प्राकृतिक घटनाओं का व्यवस्थित संकलन।

संबंधित ग्रंथ

बृहत्संहिता, पंचसिद्धांतिका