शंकर
आदि शंकराचार्य
काल (परंपरागत): लगभग 788–820 ई. (व्यापक रूप से स्वीकृत विद्वत अनुमान) · परंपरा: अद्वैत वेदांत
आदि शंकराचार्य अद्वैत वेदांत के प्रमुख प्रवर्तक-व्याख्याकार हैं, जिन्होंने ब्रह्मसूत्र, प्रमुख उपनिषदों एवं भगवद्गीता पर भाष्य लिखे तथा भारत के चार कोनों में चार मठों (शारदा पीठ-द्वारका, गोवर्धन पीठ-पुरी, ज्योतिर्मठ-बद्रीनाथ, श्रृंगेरी शारदा पीठ) की स्थापना की।
शैक्षणिक कालनिर्धारण-टिप्पणी: शंकराचार्य के जन्म-मृत्यु काल पर परंपरागत स्रोतों में भिन्नता है (कुछ परंपराएँ इन्हें कहीं अधिक प्राचीन काल में रखती हैं); आधुनिक विद्वान सामान्यतः 8वीं शताब्दी ई. को स्वीकार करते हैं।
योगदान
वेदांत दर्शन को एक संगठित, तार्किक रूप से बचाव-योग्य दार्शनिक प्रणाली के रूप में स्थापित करने का श्रेय।
शिक्षाएँ
अद्वैत (गैर-द्वैत) सिद्धांत — ब्रह्म और आत्मा की एकरूपता; माया की अवधारणा।
प्रसिद्ध कथन
ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः (परंपरागत रूप से शंकराचार्य से संबद्ध — मूल स्रोत में सटीक स्थान हेतु सत्यापन आवश्यक)
संबंधित ग्रंथ
ब्रह्मसूत्र भाष्य, भगवद्गीता भाष्य, उपनिषद भाष्य, विवेकचूड़ामणि (श्रेय-विवादित)