होम सनातन ज्ञान ग्रंथ वेद उपनिषद पुराण भगवद्गीता ऋषि एवं आचार्य देवता पवित्र स्थान विज्ञान एवं प्राचीन ज्ञान प्राचीन तकनीक दर्शन आध्यात्म एवं चेतना मंत्र एवं साधना पूजा विधि कर्म पुनर्जन्म 84 लाख योनियाँ असुर एवं अन्य लोक कहानियाँ पर्व और त्योहार आध्यात्मिक मार्गदर्शन खोजें संपर्क करें JOIN SANATAN
📜 ग्रंथ प्रमाण जीवनी-विश्वसनीयता: परंपरागत
कपिल मुनि

कपिल

काल (परंपरागत): प्राचीन काल (सटीक तिथि अनिश्चित) · परंपरा: सांख्य दर्शन

महर्षि कपिल को सांख्य दर्शन का प्रवर्तक माना जाता है — यह दर्शन पुरुष (चेतना) एवं प्रकृति (जड़ तत्त्व) के द्वैत सिद्धांत पर आधारित है।

शैक्षणिक कालनिर्धारण-टिप्पणी: सांख्यसूत्र का वर्तमान स्वरूप कणाद/कपिल के परंपरागत काल से बहुत बाद का माना जाता है; कपिल के मौलिक सांख्य-दर्शन की सामग्री ईश्वरकृष्ण की "सांख्यकारिका" (लगभग चौथी शताब्दी ई.) के माध्यम से अधिक स्पष्ट रूप से हमें प्राप्त होती है।

योगदान

योग दर्शन का सैद्धांतिक आधार — पतंजलि का योगसूत्र सांख्य के तत्त्व-सिद्धांत पर निर्भर करता है।

शिक्षाएँ

पुरुष-प्रकृति द्वैतवाद; 25 तत्त्वों का वर्गीकरण; त्रिगुण (सत्त्व, रजस्, तमस) सिद्धांत।

संबंधित ग्रंथ

सांख्यसूत्र (परंपरागत श्रेय); सांख्यकारिका (ईश्वरकृष्ण द्वारा)