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📜 ग्रंथ प्रमाण जीवनी-विश्वसनीयता: परंपरागत
कणाद (उलूक)

कणाद

काल (परंपरागत): प्राचीन काल (सटीक तिथि अनिश्चित) · परंपरा: वैशेषिक दर्शन

महर्षि कणाद वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक माने जाते हैं, जिन्होंने "वैशेषिक सूत्र" की रचना की — इसमें द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष एवं समवाय — इन छह पदार्थों (श्रेणियों) के माध्यम से भौतिक जगत का विश्लेषण किया गया है।

शैक्षणिक कालनिर्धारण-टिप्पणी: कणाद का काल निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है; विद्वानों के अनुमान ईसा-पूर्व 6वीं शताब्दी से लेकर ईसा की आरंभिक शताब्दियों तक फैले हैं।

योगदान

भारतीय भौतिक-दार्शनिक चिंतन में एक व्यवस्थित श्रेणीकरण पद्धति प्रस्तुत करने का श्रेय।

शिक्षाएँ

परमाणुवाद जैसी अवधारणा (पदार्थ के अविभाज्य कणों का सिद्धांत) एवं गुरुत्व (गुरुत्व/पतन) की चर्चा — देखें /science पर विस्तृत तुलना।

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