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📜 ग्रंथ प्रमाण जीवनी-विश्वसनीयता: परंपरागत
अक्षपाद गौतम

गौतम (न्याय दर्शन)

काल (परंपरागत): प्राचीन काल (सटीक तिथि अनिश्चित) · परंपरा: न्याय दर्शन

अक्षपाद गौतम को न्याय दर्शन के प्रवर्तक तथा "न्यायसूत्र" के रचयिता के रूप में जाना जाता है, जिसमें तर्कशास्त्र, प्रमाण (ज्ञान के साधन) एवं वाद-विवाद की पद्धति का विस्तृत विवेचन है।

शैक्षणिक कालनिर्धारण-टिप्पणी: न्यायसूत्र के रचनाकाल पर विद्वानों में मतभेद है; सामान्य अनुमान ईसा-पूर्व अंतिम शताब्दियों से ई. आरंभिक शताब्दियों के बीच रखे जाते हैं। ध्यान दें: यह वैदिक काल के "गौतम ऋषि" या बुद्ध (गौतम बुद्ध) से भिन्न व्यक्ति हैं।

योगदान

भारतीय तर्कशास्त्र (Logic) एवं ज्ञानमीमांसा (Epistemology) की नींव।

शिक्षाएँ

प्रमाण के चार भेद — प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द; तर्कशास्त्र की व्यवस्थित पद्धति।

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न्यायसूत्र

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