ब्रह्मगुप्त
ब्रह्मगुप्त
काल (परंपरागत): 598 ई. (जन्म) — भीनमाल · परंपरा: भारतीय गणित/खगोलशास्त्र
ब्रह्मगुप्त ने अपना प्रमुख ग्रंथ "ब्रह्मस्फुटसिद्धांत" 628 ई. में रचा, जिसमें शून्य को एक संख्या के रूप में तथा ऋणात्मक संख्याओं के गणितीय नियमों का स्पष्ट वर्णन मिलता है — यह गणित के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है।
योगदान
शून्य एवं दशमलव स्थानमान पद्धति के इतिहास में केंद्रीय व्यक्ति — देखें /science पर विस्तृत तुलना।
शिक्षाएँ
शून्य के गणितीय गुणों (योग, व्यवकलन) का सूत्रबद्ध वर्णन; ऋणात्मक संख्याओं के नियम; द्विघात समीकरण के हल।
संबंधित ग्रंथ
ब्रह्मस्फुटसिद्धांत, खण्डखाद्यक