ॐ
oṁ
हिन्दी अर्थ
"ॐ" को समस्त सृष्टि की मूल ध्वनि तथा ब्रह्म का ध्वन्यात्मक प्रतीक माना जाता है — माण्डूक्योपनिषद में इसे चेतना की चारों अवस्थाओं (जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति, तुरीय) के प्रतीक के रूप में विस्तार से व्याख्यित किया गया है।
प्रयोग
लगभग प्रत्येक मंत्र के आरंभ में उच्चारित; स्वतंत्र ध्यान-अभ्यास हेतु भी प्रयुक्त।
परंपरागत नियम
शुद्ध उच्चारण एवं श्रद्धापूर्ण मनःस्थिति के साथ जप की परंपरा — विशिष्ट नियम संप्रदाय-अनुसार भिन्न।
जप-नियम एवं विधि विभिन्न परंपराओं/सम्प्रदायों में भिन्न हो सकते हैं — किसी योग्य गुरु से मार्गदर्शन लेना उचित है।