वास्तु शास्त्र भारतीय स्थापत्य-परंपरा का एक अंग है, जो भवन-निर्माण, दिशा, कक्ष-विन्यास एवं अनुपात से संबंधित सिद्धांत प्रस्तुत करता है — मयमतम् एवं मानसार जैसे ग्रंथ इस परंपरा के प्रमुख स्रोत माने जाते हैं। ऐतिहासिक रूप से यह परंपरा मंदिर-वास्तुकला एवं नगर-नियोजन में उपयोग की जाती रही है — प्राचीन नगरों की व्यवस्थित संरचना (देखें /ancient-science पर नगर-नियोजन) में इसके सिद्धांतों की झलक मिलती है।

वास्तु के कुछ पहलू (जैसे प्राकृतिक प्रकाश एवं वायु-संचार हेतु दिशा-विन्यास पर बल) व्यावहारिक भवन-डिज़ाइन सिद्धांतों से मेल खाते हैं। परंतु वास्तु के कुछ अन्य दावे (जैसे किसी विशिष्ट दिशा में किसी वस्तु के रखे जाने का सीधा प्रभाव व्यक्ति के सौभाग्य/स्वास्थ्य पर पड़ना) वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं। यह वेबसाइट वास्तु को एक ऐतिहासिक स्थापत्य-परंपरा के रूप में प्रस्तुत करती है, न कि सिद्ध वैज्ञानिक भवन-विज्ञान के रूप में।