संस्कार का अर्थ है "परिष्करण" अथवा "शुद्धिकरण" — हिंदू परंपरा में गर्भाधान से लेकर अंत्येष्टि तक जीवन के विभिन्न महत्वपूर्ण चरणों को चिह्नित करने हेतु धर्मशास्त्र ग्रंथों में 16 संस्कारों (षोडश संस्कार) का उल्लेख मिलता है।

इनमें प्रमुख हैं: गर्भाधान, पुंसवन एवं सीमंतोन्नयन (गर्भावस्था से संबंधित), जातकर्म एवं नामकरण (जन्म एवं नामकरण), अन्नप्राशन (प्रथम अन्न-सेवन), चूड़ाकर्म/मुण्डन (प्रथम केश-कटाई), विद्यारंभ एवं उपनयन (शिक्षा-आरंभ, यज्ञोपवीत संस्कार), समावर्तन (शिक्षा-समापन), विवाह, तथा अंत्येष्टि (अंतिम संस्कार)। ध्यान दें: सभी 16 संस्कारों की विस्तृत सूची एवं क्रम में विभिन्न धर्मशास्त्र ग्रंथों (जैसे मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति) में कुछ भिन्नता पाई जाती है।

वर्तमान समय में इनमें से सभी संस्कार समान रूप से व्यापक रूप से प्रचलित नहीं हैं — नामकरण, मुण्डन, विवाह एवं अंत्येष्टि जैसे कुछ संस्कार आज भी व्यापक रूप से प्रचलित हैं, जबकि कुछ अन्य अपेक्षाकृत कम प्रचलन में हैं। क्षेत्रीय एवं पारिवारिक परंपरा-अनुसार विधि में भी पर्याप्त भिन्नता होती है।