साधना का अर्थ है किसी लक्ष्य (सामान्यतः आध्यात्मिक) की प्राप्ति हेतु नियमित, अनुशासित अभ्यास। यह किसी एक तकनीक तक सीमित नहीं — ध्यान, जप, प्राणायाम, स्वाध्याय (ग्रंथ-अध्ययन), सत्संग एवं सेवा — ये सभी साधना के अंग माने जाते हैं।

परंपरा में साधना की नियमितता एवं धैर्य पर विशेष बल दिया जाता है — किसी भी अभ्यास से तात्कालिक परिणाम की अपेक्षा के बजाय निरंतरता को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। एक उपयुक्त गुरु अथवा मार्गदर्शक का सान्निध्य भी परंपरागत रूप से साधना-पथ पर सहायक माना गया है, विशेषकर उन्नत अभ्यासों (जैसे उन्नत प्राणायाम अथवा कुंडलिनी-साधना) में सावधानी हेतु।