विष्णु
अन्य नाम: नारायण, हरि, जनार्दन
विष्णु त्रिमूर्ति में पालन/संरक्षण के देवता हैं तथा वैष्णव परंपरा में परब्रह्म स्वयं माने जाते हैं। वैदिक साहित्य में विष्णु का उल्लेख अपेक्षाकृत सीमित है (जैसे "त्रिविक्रम" — तीन डगों में तीनों लोक नापना), जो पौराणिक काल में केंद्रीय देवता के रूप में विकसित हुए।
प्रतीकात्मकता
शंख (सृष्टि की ध्वनि/ॐ), चक्र (सुदर्शन — समय एवं धर्म-रक्षा), गदा (शक्ति), पद्म (सृष्टि की शुद्धता), शेषनाग-शय्या (अनंत काल पर विराजमान)।
स्वरूप
दशावतार, विशेषकर राम एवं कृष्ण — जो स्वयं स्वतंत्र रूप से भी व्यापक रूप से पूजित हैं।
कथाएँ
दस अवतारों (दशावतार) के माध्यम से समय-समय पर सृष्टि की रक्षा — मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध/बलराम (परंपरा-भेद), कल्कि (भविष्य अवतार, अभी अप्रकट)।
उपासना
तुलसी-अर्पण, विष्णु सहस्रनाम पाठ, "ॐ नमो नारायणाय" मंत्र-जप।