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📚 ऐतिहासिक स्रोत vedic
वरुण

वरुण

अन्य नाम: जलेश, अप्पति

वरुण वैदिक काल में ऋत (सृष्टि की नैतिक/ब्रह्मांडीय व्यवस्था) के रक्षक एवं जल के स्वामी माने जाते थे — वैदिक काल में इनका महत्व अत्यंत उच्च था। पौराणिक काल में इनकी भूमिका मुख्यतः समुद्र/जल के देवता तक सीमित हो गई।

प्रतीकात्मकता

पाश (नैतिक व्यवस्था पर नियंत्रण), मकर-वाहन (जल पर आधिपत्य)।

स्वरूप

जलेश्वर (समुद्र/जल के अधिपति रूप में पौराणिक काल में)।

कथाएँ

ऋत (ब्रह्मांडीय नैतिक व्यवस्था) के रक्षक के रूप में वैदिक सूक्तों में वर्णित।

उपासना

मुख्यतः वैदिक यज्ञ-परंपरा में स्मरणीय।

विभिन्न सम्प्रदायों (वैष्णव/शैव/शाक्त) में इस देवता/देवी की व्याख्या एवं महत्व भिन्न हो सकता है — यह पृष्ठ किसी एक परंपरा को सार्वभौमिक नहीं मानता।

प्रसिद्ध मंदिर

वरुण के समर्पित स्वतंत्र मंदिर भारत में अत्यंत सीमित हैं।