अग्नि
अग्नि
अन्य नाम: वह्नि, पावक, हुताशन
अग्नि वैदिक यज्ञ-परंपरा के केंद्रीय देवता हैं — यज्ञ में आहुति को देवताओं तक पहुँचाने वाले "दूत" के रूप में माने जाते हैं। ऋग्वेद का प्रथम सूक्त ही अग्नि को समर्पित है।
प्रतीकात्मकता
अग्निशिखा (शुद्धिकरण), यज्ञ-वेदी (देवताओं से संपर्क का माध्यम)।
स्वरूप
हवन/यज्ञ की अग्नि (प्रतीकात्मक रूप, मूर्ति-रूप सीमित)।
कथाएँ
यज्ञ में हवि/आहुति ग्रहण कर देवताओं तक पहुँचाने वाले माध्यम के रूप में वर्णित।
उपासना
हवन-यज्ञ में केंद्रीय भूमिका — देखें /puja पर हवन-विधि।
विभिन्न सम्प्रदायों (वैष्णव/शैव/शाक्त) में इस देवता/देवी की व्याख्या एवं महत्व भिन्न हो सकता है — यह पृष्ठ किसी एक परंपरा को सार्वभौमिक नहीं मानता।
प्रसिद्ध मंदिर
अग्नि के स्वतंत्र मूर्ति-मंदिर अत्यंत दुर्लभ हैं — यज्ञ-वेदी ही मुख्य उपासना-स्थल है।