होम सनातन ज्ञान ग्रंथ वेद उपनिषद पुराण भगवद्गीता ऋषि एवं आचार्य देवता पवित्र स्थान विज्ञान एवं प्राचीन ज्ञान प्राचीन तकनीक दर्शन आध्यात्म एवं चेतना मंत्र एवं साधना पूजा विधि कर्म पुनर्जन्म 84 लाख योनियाँ असुर एवं अन्य लोक कहानियाँ पर्व और त्योहार आध्यात्मिक मार्गदर्शन खोजें संपर्क करें JOIN SANATAN
📚 ऐतिहासिक स्रोत vedic
अग्नि

अग्नि

अन्य नाम: वह्नि, पावक, हुताशन

अग्नि वैदिक यज्ञ-परंपरा के केंद्रीय देवता हैं — यज्ञ में आहुति को देवताओं तक पहुँचाने वाले "दूत" के रूप में माने जाते हैं। ऋग्वेद का प्रथम सूक्त ही अग्नि को समर्पित है।

प्रतीकात्मकता

अग्निशिखा (शुद्धिकरण), यज्ञ-वेदी (देवताओं से संपर्क का माध्यम)।

स्वरूप

हवन/यज्ञ की अग्नि (प्रतीकात्मक रूप, मूर्ति-रूप सीमित)।

कथाएँ

यज्ञ में हवि/आहुति ग्रहण कर देवताओं तक पहुँचाने वाले माध्यम के रूप में वर्णित।

उपासना

हवन-यज्ञ में केंद्रीय भूमिका — देखें /puja पर हवन-विधि।

विभिन्न सम्प्रदायों (वैष्णव/शैव/शाक्त) में इस देवता/देवी की व्याख्या एवं महत्व भिन्न हो सकता है — यह पृष्ठ किसी एक परंपरा को सार्वभौमिक नहीं मानता।

प्रसिद्ध मंदिर

अग्नि के स्वतंत्र मूर्ति-मंदिर अत्यंत दुर्लभ हैं — यज्ञ-वेदी ही मुख्य उपासना-स्थल है।