भूत एवं प्रेत
स्रोत: पुराण, गरुड़ पुराण
लोक-परंपरा एवं गरुड़ पुराण जैसे ग्रंथों में "भूत/प्रेत" ऐसी आत्माओं को कहा जाता है, जिनकी मृत्यु के पश्चात यथोचित अंत्येष्टि-संस्कार न होने, अकाल मृत्यु होने, अथवा अतृप्त इच्छाओं के कारण मुक्ति (आगे की गति) नहीं मिल पाती।
विशेषताएँ
अशरीरी अस्तित्व, विशिष्ट स्थानों (जैसे जहाँ मृत्यु हुई) से जुड़ाव — यह विवरण मुख्यतः लोक-परंपरा एवं गरुड़ पुराण जैसे ग्रंथों में मिलता है।
परंपरा के अनुसार स्वभाव
गरुड़ पुराण में विधिवत अंत्येष्टि-संस्कार एवं श्राद्ध-कर्म को आत्मा की सद्गति (आगे की यात्रा) हेतु आवश्यक बताया गया है।
रक्षा-परंपराएँ
पौराणिक परंपरा के अनुसार श्राद्ध-कर्म, पिंडदान एवं शास्त्रोक्त अंत्येष्टि-विधि को इस हेतु उपाय बताया गया है — यह एक धार्मिक अवधारणा है, इसकी वास्तविक भौतिक/आधिभौतिक उपस्थिति का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। भय अथवा मानसिक कष्ट की स्थिति में योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें (देखें /disclaimer)।